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मोम की एक गुड़िया

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आसमान भी खुश था उस दिन, घटाएँ मुस्कुराई थी, जिस दिन एक नन्ही सी परी, मेरे घर आई थी, कितना सुंदर दिन था वो, रंग खुशी का छाया था, पहली दफा प्यार से तूने, माँ जब मुझे बुलाया था, पर ग़म की आँधी ऐसी आई, दुनिया मेरी उजड़ गई, मोम की एक गुड़िया थी वो, पल भर में ही पिघल गई। लाचार इतना खुद को मैनें, पहले कभी न पाया था, दुख़ का ऐसा मंज़र था वो, मौत ने जाल बिछाया था, दुआएं करी मन्नतें मांगी, हर दरवाजा खटखटाया, पर मेरी ऐसी हालत पर भी उस खु़दा को तरस ना आया, मेरी ही गोद में तूने दम जब अपना तोड़ा था, अपनी माँ के दिल को तूने काँच की तरह तोड़ा था, खून सूख गया था मेरा, काली रात सी छायी थी, उस सफेद शय्या पर जब तू सामने मेरे आयी थी, डोली जिस घर से सजनी थी, तेरी अर्थी वहाँ से निकल गई, मोम की एक गुड़िया थी वो, पल भर में ही पिघल गई। वो पिता जिसने तुझको, इतने नाज़ों से पाला था, उनके जीवन का तो बेटी, तू ही एक सहारा था, एक झटके में ही तूने हर एक बंधन तोड़ दिया, तुझको दुनिया में लाए हम, हमसे ही मुँह मोड़ लिया, टीस सी उठती है एक मन में, कसक बन कर रह जाती है, जब नाम पुकारूँ तेरा और तू पास ना आती है, कभी न आएगी अब तू सामने खु...